1. प्राण की शक्ति
‘प्राण’ मनुष्य के जीवन में वही शक्ति रखता है जैसी ‘प्राणनाथ’ की—दोनों ही अत्यन्त प्रभावशाली और जीवन को संचालित करने वाले तत्व माने गए हैं।
2. जीवन-संगिनी शक्तियाँ
प्राण और प्राणनाथ, दोनों ही जीवन के आदि से अंत तक साथ रहते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य का अस्तित्व इन्हीं दोनों पर आधारित रहता है।
3. जीवन की निरन्तरता का आधार
मनुष्य के हर अनुभव, हर कर्म और हर चेतना का मूल स्रोत प्राण है; इसलिए इसे दिव्य और अनंत माना गया है।
4. प्राण पर नियन्त्रण का महत्व
प्राणनाथ का प्रत्यक्ष या आध्यात्मिक साक्षात्कार तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने प्राण—अर्थात् प्राणशक्ति और श्वास—पर पूर्ण नियन्त्रण प्राप्त करे। योग, ध्यान और प्राणायाम इसका मार्ग हैं।
5. आध्यात्मिक उन्नति का साधन
प्राण की गहराई को समझकर उस पर संयम स्थापित करना व्यक्ति को आत्मबोध, शान्ति और परमात्मा के सान्निध्य तक पहुँचाता है।