पंचतत्वों का संतुलन ही आत्मिक शांति का द्वार है
प्रेम सन्देश सत्संग - ऋषिकुमार संतोष December 31, 2025

पंचतत्वों का संतुलन ही आत्मिक शांति का द्वार है

1. जीवन : प्रकृति और आत्मा का संगम जीवन प्रकृति की गोद में आत्मा की यात्रा है।पंचतत्वों से बना शरीर आत्मा का साधन मात्र है।प्रकृति हमें सिख…

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जब सोच मौन होती है, तब सत्य स्पष्ट होता है।
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 30, 2025

जब सोच मौन होती है, तब सत्य स्पष्ट होता है।

1. ईश्वर प्राप्ति की अंतहीन यात्रा ईश्वर प्राप्ति की राह अत्यंत लंबी और रहस्यमयी है।यह ऐसी यात्रा है जिसका कोई अंतिम पड़ाव दिखाई नहीं देता।…

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अहंकार पतन की छाया है, और ईश्वर-स्मरण जीवन की ज्योति।
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 29, 2025

अहंकार पतन की छाया है, और ईश्वर-स्मरण जीवन की ज्योति।

1. अहंकार का अंधकार संसार में स्वयं को श्रेष्ठ और बलवान माननामनुष्य को अहंकार के अंधकार में ले जाता है।अहंकार में डूबा व्यक्ति ईश्वर को भूल…

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मन का अर्पण ही सत्य का प्रथम दर्शन है
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 27, 2025

मन का अर्पण ही सत्य का प्रथम दर्शन है

1. अज्ञानरूपी अंधकार और दिव्य प्रकाश अंधेरी काली रात्रि में जैसे बिजली की एक क्षणिक चमक सब कुछ प्रकाशित कर देती है,वैसे ही ईश्वर-स्मरण मन क…

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साधक अलग हो सकते हैं, साध्य एक ही है।
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 26, 2025

साधक अलग हो सकते हैं, साध्य एक ही है।

1. ईश्वर : जीवन का सबसे निकटतम तत्व जीवन में हमारा सबसे निकटतम तत्व स्वयं ईश्वर ही है।हमारा प्रत्येक श्वास–प्रश्वास उनकी कृपा से ही संचालित…

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शरीर मंदिर है, प्राण ही उसमें परमात्मा हैं।
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 24, 2025

शरीर मंदिर है, प्राण ही उसमें परमात्मा हैं।

1. मानवीय शरीर : ईश्वर की अद्भुत रचना हाथ, पाँव, नाक, कान आदि अवयवों से सुसज्जित यह मानव शरीर ईश्वर की अनुपम कृति है।हर अंग अपने आप में पूर…

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सबमें वही, वही सब है
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 23, 2025

सबमें वही, वही सब है

1. ईश्वर का सर्वव्यापक स्वरूप संसार में जो कुछ भी दृश्यमान है—पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, जीव-जंतु और मनुष्य—सब ईश्वर के ही विविध रूप हैं।ईश्वर क…

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भाईचारे में ही परमात्मा की कृपा है
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन December 19, 2025

भाईचारे में ही परमात्मा की कृपा है

1. एक ही परम स्रोत की संतान संसार के सभी प्राणी एक ही परम पिता की संतान हैं।भिन्न शरीर और नाम केवल बाहरी पहचान हैं।आत्मा का मूल स्रोत एक ही…

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