जीवन का लक्ष्य

जीवन का लक्ष्य

ऋषिकुमार संतोष जी के सत्संग ‘जीवन का लक्ष्य’ का सार

ऋषिकुमार संतोष जी बताते हैं कि —
जीवन का लक्ष्य केवल सुख, धन या उपलब्धि नहीं है, बल्कि अपने भीतर छिपे चैतन्य, प्रेम और सत्य का अनुभव करना है।
मनुष्य का जन्म केवल भौतिक संसार में जीने के लिए नहीं हुआ, बल्कि आत्मा की यात्रा को पूर्ण करने के लिए हुआ है।

वे कहते हैं —
“जब तक मनुष्य स्वयं को शरीर, नाम या पद तक सीमित रखता है, तब तक जीवन अधूरा रहता है।
लेकिन जब वह यह समझता है कि ‘मैं चेतना हूँ’, तब जीवन का वास्तविक आरंभ होता है।”

सत्संग में उन्होंने बताया कि —
योग और ध्यान आत्मज्ञान की ओर ले जाने वाले दो पंख हैं।
सेवा, प्रेम और करुणा से ही मनुष्य अपने अस्तित्व को शुद्ध करता है।
जीवन का लक्ष्य परमात्मा से एकत्व का अनुभव है — और यह तभी संभव है जब हम अहंकार को त्यागकर भीतर उतरें।

उनकी वाणी में सरलता और गहराई है —
“जीवन का लक्ष्य बाहर नहीं, भीतर है। लक्ष्य पाने के लिए भागना नहीं, ठहरना सीखो।”

संदेश का सार:
जीवन का सच्चा लक्ष्य है —
स्वयं को पहचानना, प्रेम में जीना, और अपने अस्तित्व को परमात्मा में विलीन करना।

https://www.youtube.com/watch?v=w9EfyP5dcLc