1) अवतारों का अनंत रहस्य
युग-युग में प्रभु के अवतार होते रहे हैं और होते रहेंगे।
उनके कर्मों की सीमा मनुष्य की समझ से परे है।
कौन कब आएगा, कब जाएगा—यह केवल ईश्वर ही जानता है।
कभी धर्म की रक्षा, कभी अधर्म का नाश—उद्देश्य सदा कल्याण है।
इसलिए अवतार केवल घटना नहीं, सृष्टि का दिव्य संकेत है।
2) समय का अटूट प्रवाह
समय रुकता नहीं—वह निरंतर बहने वाली धारा है।
दिन-रात, सप्ताह, महीने और साल चुपचाप आते-जाते रहते हैं।
हम देखते-देखते ऋतुएँ बदल जाती हैं, जीवन आगे बढ़ जाता है।
जो बीत गया वह लौटता नहीं, जो आने वाला है वह थमता नहीं।
यही समय हमें सिखाता है—चलना ही जीवन का नियम है।
3) पीढ़ियों की बदलती श्रृंखला
कितनी पीढ़ियाँ आईं और इतिहास बनकर चली गईं।
कितनी पीढ़ियाँ जन्म लेकर अपने सपने लेकर आगे बढ़ीं।
हर पीढ़ी अपने साथ नई सोच, नया संघर्ष, नया उत्साह लाती है।
पर अंत में सब उसी सत्य से मिलते हैं—परिवर्तन अटल है।
पीढ़ियाँ बदलती हैं, पर जीवन की यात्रा चलती रहती है।
4) प्रकृति का सतत आना-जाना
कितनी ही पक्षियाँ उड़कर आईं और आकाश में खो गईं।
कितनी मछलियाँ जल में जन्मीं और उसी जल में विलीन हो गईं।
फूल खिलते हैं, झरते हैं, फिर नए फूल मुस्कुराते हैं।
यह आना-जाना प्रकृति का नियम है—न दुख, न रुकावट।
प्रकृति हर पल बताती है—जीवन पुनः आरंभ होता रहता है।
5) सृष्टि की गतिशीलता
सृष्टि कहीं भी ठहरती नहीं, वह सदा चलायमान है।
कण-कण में गति है—हवा में, जल में, मन में, समय में।
जो स्थिर दिखता है, उसके भीतर भी परिवर्तन होता रहता है।
यही गति विकास का कारण है और यही जीवन का आधार।
जहाँ गति है, वहीं संभावना है; जहाँ संभावना है, वहीं सृजन है।
6) जीवन का सुंदर निष्कर्ष
जब सृष्टि गतिशील है, तो मन को भी आगे बढ़ना चाहिए।
हर बदलाव को सीख मानकर स्वीकार करना ही समझदारी है।
प्रभु की लीला और समय की चाल—दोनों हमें विनम्र बनाते हैं।
आज का क्षण ही सबसे बड़ा अवसर है—इसे सार्थक बनाइए।
चलते रहिए, सृजन करते रहिए—क्योंकि जीवन रुकने का नाम नहीं।