ज्ञान योग आत्मज्ञान और सत्य की अनुभूति का मार्ग है। यह योग मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर तथा बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है। इसमें बुद्धि, विवेक और आत्मचिंतन के माध्यम से यह जाना जाता है कि आत्मा और परमात्मा एक ही हैं।
ज्ञान योग की परिभाषा
ज्ञान योग वह मार्ग है जिसमें साधक तत्व-विवेक द्वारा यह समझता है—
“मैं शरीर नहीं, मन नहीं, बल्कि शुद्ध चेतना (आत्मा) हूँ।”
ज्ञान योग का उद्देश्य
अज्ञान का नाश
आत्मा की वास्तविक पहचान
जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति (मोक्ष)
सत्य और असत्य का विवेक
ज्ञान योग के मुख्य आधार (चार साधन)
1. विवेक (Vivek)
नित्य (सत्य) और अनित्य (असत्य) का भेद
आत्मा शाश्वत है, शरीर नश्वर है — यह समझ
2. वैराग्य (Vairagya)
सांसारिक भोगों से आसक्ति का त्याग
इच्छाओं से मुक्त होना
3. षट् संपत्ति (Shat Sampatti)
ये छह मानसिक गुण हैं—
शम – मन का संयम
दम – इंद्रियों का नियंत्रण
उपरति – विषयों से विरक्ति
तितिक्षा – सहनशीलता
श्रद्धा – गुरु और शास्त्र में विश्वास
समाधान – चित्त की एकाग्रता
4. मुमुक्षुत्व (Mumukshutva)
मोक्ष की तीव्र इच्छा
ज्ञान योग की साधना के तीन चरण
1. श्रवण
गुरु से वेदांत और उपनिषदों का श्रवण
2. मनन
सुने हुए ज्ञान पर तर्क और चिंतन
3. निदिध्यासन
ध्यान द्वारा ज्ञान को जीवन में उतारना
ज्ञान योग में प्रमुख ग्रंथ
उपनिषद
भगवद्गीता
ब्रह्मसूत्र
अद्वैत वेदांत ग्रंथ
ज्ञान योग के लाभ
भय, भ्रम और दुख का नाश
स्थिर और शांत मन
आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टि
परम शांति और आनंद
ज्ञान योग और अन्य योगों का संबंध
भक्ति योग हृदय को शुद्ध करता है
कर्म योग अहंकार को समाप्त करता है
ज्ञान योग सत्य का साक्षात्कार कराता है
तीनों मिलकर पूर्ण योग बनाते हैं।
ज्ञान योग किसके लिए उपयुक्त है?
चिंतनशील और अध्ययनप्रिय व्यक्ति
सत्य की खोज में रुचि रखने वाले
संयम और वैराग्य वाले साधक
संक्षिप्त सार
“अज्ञान ही बंधन है, ज्ञान ही मुक्ति है।”
https://youtu.be/e-aN8b-pUu8?si=5_jqiKB2pAbUEPNY